Ketan Agarwal murder case: लोहागढ़ की खाई से शुरू हुई जांच अब साजिश, डिलीट चैट और तीसरी गिरफ्तारी तक पहुंची
पुणे | Ketan Agarwal murder case
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून 2026 को लोहागढ़ किले की खाई में गिरने से मौत हुई थी। शुरुआत में घटना को ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा बताया गया, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ने पर इसे कथित हत्या और सुनियोजित साजिश के रूप में देखा जाने लगा।
इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को 23 जून को गिरफ्तार किया गया। सितंबर की शुरुआत में पुलिस ने चेतन के दोस्त रितेश हांगे को भी कथित आपराधिक साजिश में गिरफ्तार किया। हांगे को 12 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में पुलिस द्वारा जांच के दौरान सामने रखे गए आरोपों और दावों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक किसी भी आरोपी को अपराध का दोषी नहीं माना जा सकता।
लोहागढ़ किले में क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, केतन 18 जून को अपनी मंगेतर सिया और चेतन के साथ लोहागढ़ किले गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी दौरान केतन को खाई में धकेला गया।
मामले की शुरुआती कहानी में इसे दुर्घटना बताया गया था। बाद में पुलिस को घटनाक्रम, आरोपियों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों में ऐसे कथित विरोधाभास मिले, जिनके आधार पर हत्या की दिशा में जांच आगे बढ़ी। पुलिस ने घटनास्थल का पुनर्निर्माण भी कराया।
हालांकि, घटना के समय वास्तव में केतन को किस व्यक्ति ने धक्का दिया, इसे लेकर प्रत्यक्षदर्शी की मौजूदगी नहीं होने की बात बचाव पक्ष की ओर से कही गई है। सिया के वकील ने जून में दावा किया था कि पुलिस के पास उनकी मुवक्किल को सीधे हत्या से जोड़ने वाला प्रत्यक्ष सबूत या स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी नहीं है।
यही बिंदु आगे चलकर जांच और संभावित मुकदमे में महत्वपूर्ण हो सकता है।
सिया और चेतन पर क्या आरोप हैं?
पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन के बीच संबंध थे और केतन के साथ सिया की प्रस्तावित शादी को लेकर दोनों ने कथित तौर पर उसकी हत्या की योजना बनाई।
पुलिस के अनुसार, सिया और केतन की सगाई फरवरी 2026 में हुई थी और शादी प्रस्तावित थी। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया और चेतन के बीच अक्टूबर 2025 से संबंध थे और इसी वजह से केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई। दोनों को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था और बाद में न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई।
हत्या से पहले की कथित कोशिशें
जांच में पुलिस ने कथित तौर पर ऐसे घटनाक्रम का उल्लेख किया है जिन्हें वह हत्या की पूर्व तैयारी से जोड़ रही है।
पुलिस के अनुसार, केतन को खत्म करने के लिए कम से कम तीन कथित प्रयास किए गए थे और बाद में लोहागढ़ में मौका मिलने पर कथित योजना को अंजाम दिया गया। इन दावों में एक घटना ऐसी भी बताई गई है जिसमें सिया ने कथित तौर पर सांप से बचाने के बहाने केतन को धक्का देने की कोशिश की थी।
हालांकि, इन घटनाओं की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन्हें पुलिस के जांच-दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बाली ट्रिप और फटे पासपोर्ट का एंगल
जांच में केतन और सिया की प्रस्तावित बाली यात्रा भी सामने आई।
पुलिस का दावा है कि यात्रा को लेकर चेतन को आपत्ति थी और इसके बाद केतन का पासपोर्ट कथित तौर पर फाड़ दिया गया, जिसके कारण यात्रा रद्द हो गई। पुलिस इस घटनाक्रम को कथित साजिश की कड़ी के तौर पर देख रही है।
केतन के परिवार ने हालांकि उन रिपोर्टों पर सवाल उठाए हैं जिनमें उनके बालों के पैच/विग को कथित विवाद का कारण बताया गया। केतन के पिता ने कहा कि यह बात सिया के परिवार से छिपी हुई नहीं थी। इसलिए इस तथाकथित ‘विग एंगल’ को हत्या का स्थापित कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी।
डिजिटल सबूतों ने बदली जांच की दिशा
इस मामले में डिजिटल साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।
पुलिस ने कथित तौर पर चेतन के फोन से डिलीट किए गए WhatsApp चैट्स बरामद किए। इन्हीं चैट्स की फॉरेंसिक जांच के दौरान उसके दोस्त रितेश हांगे की भूमिका पुलिस के सामने आने का दावा किया गया।
पुलिस के मुताबिक, हांगे को कथित साजिश की जानकारी थी और हत्या के बाद भी चेतन और सिया ने उससे घटना के बारे में बात की थी। पुलिस का कहना है कि चेतन और हांगे के बीच हुई कुछ बातचीत डिलीट कर दी गई थी, जिसे फॉरेंसिक प्रक्रिया के जरिए रिकवर किया गया।
तीसरी गिरफ्तारी: रितेश हांगे कौन है?
सितंबर 2026 में पुलिस ने रितेश हांगे, जो चेतन का पुराना दोस्त बताया गया है, को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, हांगे को चेतन की कथित योजना की जानकारी थी और उसने कथित साजिश से संबंधित जानकारी साझा की थी। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, यानी आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान, के तहत कार्रवाई की गई है।
5 सितंबर को उसे अदालत में पेश किया गया और रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस को उसकी हिरासत 12 सितंबर तक मिली। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी भूमिका केवल कथित जानकारी रखने तक सीमित थी या उसने योजना को आगे बढ़ाने में भी कोई सक्रिय भूमिका निभाई।
कॉन्ट्रैक्ट किलर से लेकर लोहागढ़ तक?
सितंबर में सामने आए एक और पुलिस दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट किलर के जरिए केतन की हत्या कराने पर विचार किया था, लेकिन बाद में यह योजना बदल दी गई। पुलिस का कहना है कि इसके बाद हत्या को कथित तौर पर अलग तरीके से अंजाम देने की योजना बनाई गई।
यह दावा यदि जांच और अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों से पुष्ट होता है तो अभियोजन पक्ष के लिए कथित पूर्व नियोजित साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। फिलहाल यह पुलिस जांच में सामने आया आरोप है, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
पॉलिग्राफ टेस्ट का मामला
जांच के दौरान पुलिस ने सिया और चेतन के पॉलिग्राफ टेस्ट की दिशा में भी कदम बढ़ाने की कोशिश की थी। हालांकि दोनों ने परीक्षण से इनकार किया और जुलाई में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी आरोपी का पॉलिग्राफ टेस्ट स्वीकार या अस्वीकार करना अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आपराधिक मुकदमे में अदालत अंततः स्वीकार्य साक्ष्यों और कानून के आधार पर फैसला करती है।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में उज्ज्वल निकम
हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने की जानकारी जून में सामने आई थी। उन्होंने मामले की अभियोजन रणनीति को लेकर सार्वजनिक रूप से बात भी की थी।
इस नियुक्ति से संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है, हालांकि किसी वरिष्ठ वकील की नियुक्ति भी आरोपियों की दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं होती।
केतन के परिवार ने क्या कहा?
केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की थी। उन्होंने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग भी सार्वजनिक रूप से रखी।
परिवार की पीड़ा और न्याय की मांग इस मामले का मानवीय पक्ष है। लेकिन पत्रकारिता की दृष्टि से परिवार के आरोपों और पुलिस के दावों को न्यायालय द्वारा स्थापित तथ्यों से अलग रखना आवश्यक है।
अभी सबसे बड़े सवाल क्या हैं?
जांच में कई अहम सवालों के जवाब अभी अदालत के सामने पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी हैं:
- क्या केतन को वास्तव में जानबूझकर खाई में धकेला गया था?
- यदि हत्या हुई, तो घटना को अंजाम देने वाला व्यक्ति कौन था?
- सिया और चेतन की कथित भूमिका किस स्तर तक थी?
- रितेश हांगे की भूमिका केवल कथित जानकारी रखने तक थी या वह साजिश में सक्रिय था?
- डिलीट किए गए चैट्स और अन्य डिजिटल डेटा अदालत में किस हद तक स्वीकार्य और निर्णायक साबित होंगे?
- कथित पूर्व प्रयासों और कॉन्ट्रैक्ट किलर वाली योजना के स्वतंत्र प्रमाण क्या हैं?
- हत्या के पीछे वास्तविक और कानूनी रूप से स्थापित मकसद क्या था?
अब तक की टाइमलाइन
फरवरी 2026: केतन और सिया की सगाई हुई। पुलिस के मुताबिक शादी बाद में प्रस्तावित थी।
18 जून 2026: लोहागढ़ किले में केतन की मौत हुई। शुरुआती तौर पर घटना को दुर्घटना माना गया। बाद में पुलिस ने हत्या की दिशा में जांच की।
23 जून 2026: सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया गया।
जून के अंतिम सप्ताह: पुलिस ने कथित पूर्व प्रयासों, बाली ट्रिप, पासपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और घटनास्थल के पुनर्निर्माण सहित कई पहलुओं की जांच की।
जुलाई 2026: दोनों आरोपियों के पॉलिग्राफ टेस्ट से जुड़े प्रयास सामने आए; बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
5 सितंबर 2026: चेतन के मित्र रितेश हांगे की तीसरी गिरफ्तारी हुई।
7 सितंबर 2026: पुलिस ने कथित तौर पर कॉन्ट्रैक्ट किलर के जरिए हत्या कराने की शुरुआती योजना का दावा किया।
निष्कर्ष: जांच में कई परतें खुलीं, लेकिन अंतिम फैसला अदालत का
केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल लोहागढ़ किले में हुई एक संदिग्ध मौत की जांच नहीं रह गया है। पुलिस के अनुसार, मामले में कथित प्रेम संबंध, पूर्व योजना, असफल प्रयास, बाली यात्रा, पासपोर्ट, डिजिटल चैट्स और अब तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी जैसी कई कड़ियां सामने आई हैं।
लेकिन जांच में सामने आया दावा और अदालत में साबित अपराध—दो अलग चीजें हैं। सिया गोयल, चेतन चौधरी और रितेश हांगे के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
रिपोर्टिंग नोट: इस रिपोर्ट में ‘आरोपी’, ‘पुलिस के अनुसार’, ‘जांचकर्ताओं का दावा’ जैसे शब्द जानबूझकर इस्तेमाल किए गए हैं ताकि आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत न किया जाए।

