Ujjain Hanuman Temple: उज्जैन के ‘खड़े हनुमान’ मंदिर की प्रतिमा क्यों बनी चर्चा का विषय? हटाने की कोशिशें नाकाम
उज्जैन: Ujjain Hanuman Temple मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित प्राचीन ‘खड़े हनुमान’ मंदिर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वजह है मंदिर की करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, जिसे सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कई कोशिशों के बावजूद अब तक हटाया नहीं जा सका है। इस घटनाक्रम को लेकर श्रद्धालुओं के बीच इसे ‘चमत्कार’ बताए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
सड़क चौड़ीकरण की जद में आया प्राचीन मंदिर
रिपोर्टों के मुताबिक, उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर को विकास परियोजना के कारण दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी। मंदिर को करीब 170 वर्ष पुराना बताया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर इसका संबंध 1857 के आसपास के दौर से जोड़ा जाता है।
मंदिर के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को स्थानांतरित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
कई प्रयास, लेकिन प्रतिमा नहीं हिली
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिमा को हटाने के लिए भारी मशीनों और क्रेन की मदद ली गई। कई प्रयासों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। कुछ रिपोर्टों में लगातार कई दिनों और चार प्रयासों के विफल होने की बात कही गई है। इसके बाद विशेषज्ञों से प्रतिमा और उसके आसपास की संरचना की स्कैनिंग कराने की तैयारी की जा रही है।
यही तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। वीडियो में मशीनों के इस्तेमाल और मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है।
भक्त इसे मान रहे हैं ‘चमत्कार’
प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर धार्मिक आस्था और भी मजबूत हुई है। कई भक्त इसे भगवान हनुमान की इच्छा और दैवीय संकेत मान रहे हैं। मंगलवार को मंदिर स्थल पर भजन-कीर्तन और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।
हालांकि, प्रतिमा का नहीं हिलना अपने आप में किसी चमत्कार का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। विशेषज्ञों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा की संरचना, उसका आधार, जमीन से जुड़ाव या अन्य तकनीकी कारण स्थानांतरण में बाधा क्यों बन रहे हैं।
पुरातात्विक महत्व भी चर्चा में
इस मामले में केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि प्रतिमा की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत भी महत्वपूर्ण है। एक पुरातत्वविद् के हवाले से रिपोर्टों में प्रतिमा को मालवा के बेसाल्ट पत्थर से निर्मित और परमार कालीन शिल्प परंपरा से जोड़कर देखा गया है। वहीं, प्रतिमा को हटाने से उसमें दरार या नुकसान होने की आशंका भी जताई गई है।
यही कारण है कि प्रशासन के सामने चुनौती केवल सड़क चौड़ीकरण की नहीं, बल्कि एक प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की भी है।
‘चमत्कार’ या तकनीकी चुनौती?
उज्जैन के खड़े हनुमान की घटना ने आस्था और तकनीक के बीच एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है। श्रद्धालु जहां इसे हनुमान जी की इच्छा और आस्था से जोड़ रहे हैं, वहीं प्रशासन और विशेषज्ञों के लिए प्राथमिकता प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षित स्थानांतरण की तकनीकी संभावनाओं को समझना है।
फिलहाल प्रतिमा अपनी जगह पर कायम है और इसके आगे के स्थानांतरण को लेकर विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच ‘खड़े हनुमान’ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं, जिससे उज्जैन का यह प्राचीन मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
नोट: इस रिपोर्ट में ‘चमत्कार’ शब्द श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है; इसे किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

