Gurugram hit and run case: बाइक सवार युवती को कार से टक्कर

Gurugram hit and run case: बाइक सवार युवती को कार से टक्कर, आरोपी गिरफ्तार; अब तक क्या-क्या हुआ?

गुरुग्राम: Gurugram hit and run case: हरियाणा के गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स रोड पर एक महिला बाइक सवार को कार से टक्कर मारने का मामला इन दिनों देशभर में चर्चा में है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने मुख्य आरोपी कार चालक को राजस्थान से गिरफ्तार किया और बाद में मामले में हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।

मामले में अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वहीं कार में मौजूद बताए जा रहे दो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

क्या है पूरा मामला?

घटना 13 सितंबर 2026 की सुबह गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड इलाके में हुई। दिल्ली की रहने वाली शिवानी चौहान, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘सिया’ के नाम से जाना जाता है, अपनी Aprilia RS 457 बाइक पर अन्य बाइक सवारों के साथ जा रही थीं।

पुलिस के अनुसार, इसी दौरान एक Maruti Suzuki Ciaz कार और बाइक सवारों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद कार ने कथित तौर पर शिवानी की बाइक का पीछा किया और कुछ दूरी तक उसके साथ चलने के बाद उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

घटना का वीडियो शिवानी की बाइक पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। फुटेज में कार को बाइक के पास आते और टक्कर के बाद मौके से निकलते हुए देखा गया।

टक्कर के बाद शिवानी सड़क पर गिर गईं और उन्हें चोटें आईं। हालांकि, उनकी चोटें जानलेवा नहीं बताई गई हैं।

वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई पुलिस जांच

शुरुआत में शिवानी की ओर से तत्काल लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद गुरुग्राम पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने मामले का संज्ञान लिया।

इसके बाद सेक्टर-56 थाने में BNS की धारा 281 यानी तेज/लापरवाही से वाहन चलाने और 125 यानी किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की गई।

पुलिस ने आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कीं।

आरोपी Kalyan Bainsla कौन है?

पुलिस ने मामले में 33 वर्षीय कल्याण बैंसला को मुख्य आरोपी बताया है। वह पलवल का रहने वाला है और जिम तथा रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा बताया गया है।

पुलिस के मुताबिक, घटना में इस्तेमाल Ciaz किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत थी और बैंसला ने उसे उधार लिया था। पुलिस ने बाद में वाहन बरामद कर लिया।

बैंसला और उसके चचेरे भाई लवनीश/लवनेश को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने उन्हें राजस्थान के दौसा/राजगढ़ क्षेत्र से पकड़ा।

पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा क्यों जोड़ी?

मामले में सबसे बड़ा कानूनी बदलाव आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हुआ।

पुलिस ने CCTV फुटेज, बाइक कैमरा फुटेज और पीड़िता के बयान की जांच के बाद दावा किया कि कार ने बाइक का पीछा किया और टक्कर महज दुर्घटना नहीं बल्कि जानबूझकर की गई कार्रवाई प्रतीत होती है।

इसके बाद BNS की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) जोड़ी गईं। इसके अलावा पुलिस ने महिला का पीछा करने से संबंधित धारा 78 तथा महिला की गरिमा का अपमान करने वाले शब्द, इशारे या कृत्य से संबंधित धारा 79 भी जोड़ी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप/धाराएं हैं। मामले में अंतिम दोष या निर्दोषता अदालत के निर्णय से तय होगी।

आरोपी का क्या कहना है?

कल्याण बैंसला ने जानबूझकर महिला को टक्कर मारने के आरोप से इनकार किया है।

उसका दावा है कि वह परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ था और बाइक सवारों के साथ विवाद के बाद स्थिति बिगड़ गई। उसके मुताबिक, U-turn के पास उसका कार पर नियंत्रण बिगड़ा और टक्कर हो गई।

बैंसला ने यह भी कहा कि दुर्घटना के बाद वह इसलिए नहीं रुका क्योंकि उसे डर था कि वहां मौजूद बाइक सवार उस पर हमला कर सकते हैं। उसने टक्कर को अपनी गलती माना, लेकिन जानबूझकर बाइक सवार को निशाना बनाने से इनकार किया।

दूसरी ओर, शिवानी ने आरोपी के इस पक्ष को खारिज किया है और कहा है कि वीडियो घटनाक्रम को अलग तरीके से दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार ने उनका पीछा किया और जानबूझकर टक्कर मारी।

क्या घटना से पहले पार्टी की गई थी?

जांच में यह पहलू भी सामने आया है।

SIT से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि बैंसला, उसका चचेरा भाई और दो अन्य लोग घटना से पहले रात में एक क्लब में थे और सुबह वहां से निकले। पुलिस ने क्लब से CCTV फुटेज और DVR डेटा मांगा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी कब वहां पहुंचे, कितनी देर रुके और वहां से कब निकले।

कुछ रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि आरोपियों के शराब पीने की जांच के लिए बैंसला के ब्लड और यूरिन सैंपल लिए गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है।

इसलिए शराब के सेवन को लेकर सामने आई जानकारी को फिलहाल जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए, अंतिम तथ्य नहीं।

गिरफ्तारी के दौरान भी हुआ घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद बैंसला को गुरुग्राम लाया जा रहा था। इसी दौरान उसने पेशाब करने के लिए वाहन रोकने को कहा और कथित तौर पर भागने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, भागने के दौरान वह गिर गया और उसके हाथ तथा सिर में चोट लगी। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उसे वापस पुलिस हिरासत में लिया गया।

दो दिन की पुलिस रिमांड, फिर न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी के बाद बैंसला और उसके चचेरे भाई लवनीश को अदालत ने दो दिन की पुलिस रिमांड में भेजा था।

पुलिस ने रिमांड के दौरान घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने, आरोपियों से पूछताछ करने और मामले में शामिल बताए जा रहे अन्य लोगों का पता लगाने की कोशिश की।

18 सितंबर को रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

चार लोगों के कार में होने का दावा

शिवानी ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि कार में कुल चार लोग मौजूद थे।

पुलिस ने कार में मौजूद बताए जा रहे दो अन्य लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घटना से पहले और बाद में उनकी क्या भूमिका थी।

SIT इस पूरे घटनाक्रम को CCTV, वाहन कैमरा फुटेज, मोबाइल डेटा और संबंधित लोगों के बयानों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है।

पांच सदस्यीय SIT ने संभाली जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

SIT में ACP स्तर के अधिकारी, सेक्टर-56 थाना प्रभारी, सोहना क्राइम ब्रांच के अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। टीम का उद्देश्य घटना के हर पहलू की जांच करना और उपलब्ध डिजिटल तथा प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को स्पष्ट करना है।

आरोपी के समर्थन में महापंचायत भी हुई

मामले ने कानूनी जांच के साथ सामाजिक बहस का रूप भी ले लिया है। 18 सितंबर को आरोपी कल्याण बैंसला के समर्थन में एक महापंचायत बुलाए जाने की खबर सामने आई।

शिवानी और उनके परिवार ने इस तरह की लामबंदी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित अपराध के खिलाफ है। शिवानी के पिता ने भी कहा कि मामला कानून और पुलिस जांच के जरिए आगे बढ़ना चाहिए।

शिवानी ने क्या कहा?

शिवानी ने घटना के बाद सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने आरोपी के उस दावे को खारिज किया कि उन्होंने मामले को प्रचार या ‘विक्टिम कार्ड’ के तौर पर इस्तेमाल किया।

उन्होंने यह भी कहा कि वह केवल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं हैं और कार में मौजूद बताए जा रहे अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच और कार्रवाई चाहती हैं।

20 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक शिवानी ने दुर्घटना के बावजूद दोबारा बाइक चलाने की इच्छा भी जताई है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस के सामने मुख्य सवाल हैं—

  • घटना से पहले कार और बाइक सवारों के बीच वास्तव में क्या हुआ?
  • क्या कार ने जानबूझकर बाइक का पीछा किया था?
  • टक्कर दुर्घटनावश हुई या जानबूझकर?
  • कार में मौजूद अन्य दो लोगों की भूमिका क्या थी?
  • घटना से पहले आरोपी कहां थे और उनके बीच क्या बातचीत हुई?
  • CCTV और बाइक कैमरा फुटेज पूरे घटनाक्रम को किस तरह प्रमाणित करते हैं?
  • मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट क्या बताती हैं?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पेश होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

मामला सिर्फ एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं

गुरुग्राम की यह घटना सड़क पर होने वाले विवाद, आक्रामक ड्राइविंग, महिलाओं की सड़क सुरक्षा और वायरल वीडियो के आधार पर शुरू होने वाली पुलिस कार्रवाई जैसे कई सवालों को सामने लाती है।

हालांकि सोशल मीडिया पर घटना को लेकर अलग-अलग दावे और पक्ष सामने आ रहे हैं, लेकिन कानूनी रूप से निर्णायक तथ्य वही होंगे जो जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और अदालत के समक्ष रखे जाएंगे।

नेशनल न्यूज़ ब्लॉग की अपील: वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने से बचें। मामले में आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

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