Parvinder Singh Jhota: कौन थे परविंदर सिंह झोटा? Facebook Live पर गोली मारकर हत्या, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार
Punjab | Parvinder Singh Jhota murder case
पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मेडिकल स्टोर पर विवाद के दौरान फेसबुक लाइव कर रहे झोटा को गोली मार दी गई थी। अब इस मामले के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की खबर है। घटना के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन, मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
14 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पंजाब ले जाने की प्रक्रिया में थी। इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इस घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।
कौन थे परविंदर सिंह झोटा?
परविंदर सिंह झोटा मानसा क्षेत्र में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्हें ‘बाबा बॉक्सर’ के नाम से भी जाना जाता था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके थे। बाद में उन्होंने नशे की समस्या के खिलाफ आवाज उठाने और कथित तौर पर नशीले पदार्थ बेचने वालों को उजागर करने पर ध्यान केंद्रित किया।
झोटा मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित या नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाते थे। वह संबंधित दुकानों पर पहुंचकर सवाल पूछते और अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड करते थे। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते थे।
उनका काम हालांकि विवादों से भी जुड़ा रहा। वर्ष 2023 में एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ उनका विवाद हुआ था। उस मामले में झोटा पर भी मारपीट और कथित अतिक्रमण से संबंधित आरोप लगे थे। मौजूदा घटना में पुराने विवाद की भूमिका की भी जांच किए जाने की खबर है।
Facebook Live के दौरान कैसे हुई हत्या?
13 अक्टूबर 2026 को झोटा अपने कुछ साथियों के साथ मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह दुकानदार अश्वनी कुमार से एक बुजुर्ग व्यक्ति को कथित तौर पर नशीली दवाएं बेचे जाने के आरोप को लेकर सवाल कर रहे थे।
झोटा इस बातचीत को फेसबुक पर लाइव प्रसारित कर रहे थे। सामने आए वीडियो में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती दिखाई देती है। वीडियो के अनुसार, दुकानदार के पास पिस्तौल थी और बहस के दौरान उसने कथित तौर पर झोटा तथा उनके साथियों पर गोली चला दी।
गोलीबारी के बाद झोटा और उनके साथी वहां से निकलने की कोशिश करते दिखाई दिए। एक अन्य वीडियो में हथियार लिए एक व्यक्ति के उनका पीछा करने की बात भी रिपोर्ट की गई है।
झोटा को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें पेट और जांघ में तीन गोलियां लगी थीं। उनके चार साथी भी गोलीबारी में घायल हुए।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंजाब में व्यापक आक्रोश फैल गया।
राजस्थान के सालासर से मुख्य आरोपी गिरफ्तार
14 अक्टूबर को प्रकाशित The New Indian Express और India Today की रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्तौल बरामद की गई।
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए तलाश अभियान चलाया था। एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी को फरार होने में कथित तौर पर मदद करने के मामले में हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
मामले में गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन हत्या के पीछे की पूरी वजह, गोलीबारी की परिस्थितियां और पुराने विवाद की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
मानसा में मेडिकल स्टोर पर बुलडोजर, फिर आगजनी
झोटा की हत्या के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। 14 अक्टूबर को सामने आई The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का एक समूह बुलडोजर लेकर आरोपी के मेडिकल स्टोर पर पहुंचा और दुकान को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद वहां आग लगा दी गई।
इसी दौरान प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से और सामने की संरचना को भी बुलडोजर से गिराया। अधिकारियों के अनुसार, परिसर में कथित अनधिकृत निर्माण की जानकारी मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
दुकान को नुकसान पहुंचाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के घर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई और किसी संपत्ति को गिराने की प्रशासनिक कार्रवाई अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। किसी भी कार्रवाई की वैधता संबंधित दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होती है।
पिता ने बेटे के अंतिम संस्कार से किया इनकार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झोटा के पिता भीम सिंह ने न्याय मिलने तक बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
झोटा की हत्या के बाद समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया और नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई। परिवार और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बीच पुलिस तथा प्रशासन पर निष्पक्ष जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दबाव बढ़ा।
अंतिम संस्कार और परिवार की मांगों को लेकर आगे की स्थिति में किसी भी बदलाव की पुष्टि ताजा आधिकारिक बयान से की जानी चाहिए।
NHRC ने लिया संज्ञान, राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट
14 अक्टूबर को प्रकाशित The New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झोटा की हत्या का संज्ञान लिया और पंजाब सरकार से मामले में कार्रवाई तथा जांच की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा तथा नशे के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस घटनाक्रम से मामले को लेकर मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा के पहलू भी सामने आए हैं। हालांकि, आयोग का संज्ञान लेना अपने आप में किसी आरोप की न्यायिक पुष्टि नहीं है। आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच कानून-व्यवस्था पर बहस
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा से जुड़े नेताओं ने घटना की आलोचना की और नशे के खिलाफ अभियान तथा नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
सत्तारूढ़ दल की ओर से भी घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई।
राजनीतिक आरोपों और दावों से अलग, इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल हैं कि गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई, आरोपी के खिलाफ कौन-कौन से आरोप साबित होते हैं और नशे की कथित अवैध बिक्री को रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों ने पहले क्या कदम उठाए थे।
पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा
परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के तरीकों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर समस्याओं को सामने ला सकते हैं, लेकिन आरोपों की जांच और कानूनी कार्रवाई पुलिस तथा संबंधित नियामक संस्थाओं के माध्यम से होनी चाहिए।
कथित अवैध बिक्री की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई, नशामुक्ति सेवाओं की उपलब्धता, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा इस चुनौती से निपटने के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
झोटा की मौत के बाद अब निगाहें पुलिस जांच, आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, परिवार की मांगों और NHRC द्वारा मांगी गई रिपोर्ट पर टिकी हैं।
निष्कर्ष: परविंदर सिंह झोटा की फेसबुक लाइव के दौरान हुई हत्या ने मानसा में आक्रोश पैदा कर दिया है। मुख्य आरोपी की राजस्थान से गिरफ्तारी के बाद जांच एक नए चरण में पहुंची है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन और संपत्ति पर कार्रवाई के बीच यह जरूरी है कि मामले में न्याय कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित किया जाए और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो।

