ACB arrests Satyendra Jain: दिल्ली जल बोर्ड STP टेंडर मामला, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह गिरफ्तार

ACB arrests Satyendra Jain: दिल्ली जल बोर्ड STP टेंडर मामला, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह गिरफ्तार

नई दिल्ली, ACB arrests Satyendra Jain: दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti-Corruption Branch-ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली सरकार के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय (IAS) और पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव शामिल हैं। इनके अलावा तीन निजी व्यक्तियों—नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा—को भी गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई FIR संख्या 10/2024, दिनांक 11 मई 2024, के संबंध में की गई है। यह FIR दिल्ली सरकार के Anti-Corruption Branch थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।

मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के augmentation और upgradation से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों से जुड़ा है।

कैसे शुरू हुई जांच?

मामले की शुरुआत दिल्ली सरकार के Directorate of Vigilance की शिकायत से हुई। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा STP से जुड़े टेंडरों की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया गया था। आरोप था कि टेंडर की शर्तों को इस तरह प्रभावित किया गया कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए और किसी विशेष तकनीक अथवा कंपनी को फायदा पहुंच सके।

ACB ने इसी शिकायत के आधार पर 11 मई 2024 को FIR दर्ज की। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 7A, 9 और 13 तथा IPC की धाराएं 420, 409, 418 और 120-B शामिल की गई थीं।

इन धाराओं में रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, सरकारी पद के दुरुपयोग, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

छह लोगों पर कार्रवाई

ACB के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार किए गए छह आरोपी हैं:

  1. सत्येंद्र कुमार जैन — दिल्ली सरकार के पूर्व जल मंत्री
  2. उदित प्रकाश राय (IAS) — दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO
  3. अंकित श्रीवास्तव — दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार
  4. नागेंद्र यादव — M/s AN Enterprises के प्रोपराइटर
  5. राजा कुमार कुर्रा — M/s Euroteck Environment Pvt. Ltd. के मालिक
  6. पंकज वर्मा — M/s Srijanhar के प्रोपराइटर

इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित टेंडर हेरफेर की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी और सरकारी अधिकारियों तथा निजी कंपनियों के बीच किस प्रकार का संपर्क एवं लेन-देन हुआ।

टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप

मामले का मुख्य केंद्र दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने और उनके उन्नयन के लिए जारी किए गए टेंडर हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी ACB FIR के आधार पर बाद में जांच की थी। ED ने दिसंबर 2025 में दाखिल अपनी अभियोजन शिकायत में आरोप लगाया था कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को कथित तौर पर इस तरह बदला गया कि IFAS technology with fixed media से जुड़ी एक विशेष कंपनी को लाभ मिल सके।

ED के अनुसार, मामले में कथित तौर पर चार STP टेंडर शामिल थे, जिनका संबंध दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के augmentation और upgradation से था। इन स्थानों में पप्पनकलां, निलोठी, नजफगढ़, केशोपुर, कोरोनेशन पिलर, नरेला, रोहिणी और कोंडली शामिल थे।

ED ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर के जरिए Euroteck Environmental Pvt. Ltd. को फायदा पहुंचाया गया और लगभग 6.73 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमीशन/रिश्वत का भुगतान हुआ। एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि इससे संबंधित कंपनी को लगभग 9.96 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ मिला।

हालांकि, इन आरोपों को अदालत में साबित किया जाना अभी बाकी है। किसी भी आरोपी को केवल गिरफ्तारी या जांच एजेंसी के आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।

पहले भी ED कर चुकी है कार्रवाई

इस मामले में ACB की FIR के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की थी। दिसंबर 2025 में ED ने सत्येंद्र जैन सहित 14 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। एजेंसी ने उस समय दावा किया था कि कथित अपराध से जुड़े कुल 17.70 करोड़ रुपये के proceeds of crime का पता चला है।

ED ने यह भी बताया था कि उसने आरोपियों से संबंधित करीब 15.36 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं।

इससे स्पष्ट है कि दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर से जुड़ा मामला केवल टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न केंद्रीय और दिल्ली सरकार की जांच एजेंसियों तक पहुंच चुका है।

राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल भी अहम

सत्येंद्र जैन के मामले में राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। जिस अवधि के टेंडर इस जांच के केंद्र में हैं, उस समय जैन दिल्ली सरकार में जल मंत्री और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका में थे। ED की जांच में भी तत्कालीन DJB अधिकारियों और निजी पक्षों की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया था।

वहीं, आम आदमी पार्टी पहले ED की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोपों को खारिज कर चुकी है और कहा है कि वह मामलों का सामना अदालत में करेगी।

ऐसे में अब ACB की ताजा गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। एजेंसी को अदालत के समक्ष आरोपों से संबंधित साक्ष्य, टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर की कड़ी, अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच संबंध तथा कथित वित्तीय लेन-देन का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा।

आगे क्या होगा?

छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसी टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड, तकनीकी शर्तों को तैयार करने की प्रक्रिया, अधिकारियों के निर्णय, कंपनियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच करेगी।

इस मामले में अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। फिलहाल ACB की कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण जांच कदम के रूप में देखा जा रहा है। मामले की आगे की सुनवाई और जांच से यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली जल बोर्ड की STP परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और सरकारी प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने में किस स्तर तक साजिश हुई।

National News Blog के लिए महत्वपूर्ण: यह खबर जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध आधिकारिक/रिपोर्टेड विवरणों पर आधारित है। आरोप अदालत में सिद्ध होने तक सभी आरोपियों को कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है।

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