सिनेमा से प्यार करने वाली नंदिनी खोसला पहुंची कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल

सिनेमा से प्यार करने वाली नंदिनी खोसला पहुंची कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल

बचपन से ही सिल्वर स्क्रीन की चमक-दमक से प्रभावित 24 साल की अभिनेत्री नंदिनी खोसला (Nandinee Khosla) इस बार कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival 2025) की रेड कारपेट पर पहुंची तो मानो उनके सपनो को उड़ान भरने के लिए पंख मिल गए हो। मुंबई में पली-बड़ी नंदिनी को शुरू से एक्टिंग में विशेष रूचि रही है। पढाई के साथ-साथ उन्होंने स्कूल के दिनों से ही थिएटर की ओर रुझान कर लिया था। 2018 से वो बतौर प्रोफेशनल एक्टर थिएटर कर रही है औऱ ‘दी सेकंड विंड’ (The Second Wind) से वो बड़े परदे पर डेब्यू करने जा रही है। इसी फ़िल्म की स्क्रीनिंग के लिए उन्हें कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल (Cannes 2025) के लिए आमंत्रित किया गया था।

कांन्स 2025 में अपने अनुभव को नेशनल न्यूज़ ब्लॉग से ख़ास बातचीत में साझा करते हुए उन्होंने कहा कि

“एक कलाकार के रूप में अपने देश का कांन्स जैसे अंतराष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए एक बहुत ही गौरवशाली अनुभव रहा। मैं अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली मानती हूँ कि इतनी छोटी सी उम्र में मुझे यहाँ अलग-अलग देशों से आये कलाकरो से मिलने का औऱ विभिन्न तरह के सिनेमा को जानने और समझने का मौक़ा मिला।”

सालों से ऐश्वर्या राय, सोनम कपूर (Sonam Kapoor), दीपिका पादुकोणे (Deepila Padukone) जैसी बॉलीवुड की जानीमानी हस्तियों को कांन्स की रेड कारपेट पर चलते देखा और अब जब ख़ुद को ये अवसर मिला तो वो यकीन ही नहीं कर पा रही थी। वो उत्साहित थी और भावुक भी और ये लम्हा उनके लिए सबसे यादगार रहा। इंदिरा बाइकेरिकर की फ़िल्म ‘दी सेकंड विंड’ में नंदिनी मोना का किरदार निभाती नज़र आएगी, जो कि एक कॉलेज स्टूडेंट है। कांन्स 2025 में प्रदर्शित होने वाली ये एकमात्र महिला प्रधान भारतीय फ़िल्म है जो चार अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि की महिलाओ के जीवन पर आधारित है। इस फ़िल्म को कांन्स में काफ़ी सराहना भी मिली है।

नंदिनी हिन्दी, मराठी और गुजराती भाषा के बहुत से थिएटर प्ले कर चुकी है और अभिनय के साथ-साथ वो लिखती भी है और डायरेक्ट भी करती है। हालांकि उनका मानना है कि एक्टिंग एक जॉब नहीं बल्कि प्रोफेशन है, तो इसमें आपने भले ही कितना भी काम कर लिया हो और कितने ही साल एक्टिंग को दिए हो, हर कलाकार फ़िर भी हमेशा नए और अच्छे काम की तलाश में रहता ही है।

शुरुआती दौर में ये संघर्ष और कड़ा होता है और बदलते वक़्त के साथ फ़िल्ममेकर्स भी आजकल सोशल मीडिया की फोल्लोविंग को देख कर कास्टिंग करने लगे है। जिनकी फोल्लोविंग अच्छी होती है, आजकल उन्हें प्राथमिकता दी जाने लगी है, ताकि उनके बदौलत अच्छा प्रमोशन हो सके। इस बढ़ते चलन के ख़िलाफ़ बॉलीवुड के ही बहुत से सीनियर कलाकारों ने नाराज़गी जताई है, जहाँ ऑडिशन से पहले उनसे सोशल मीडिया प्रोफाइल मांगी जाने लगी है और प्राथमिकता ऐसे कलाकार को दी जाने लगी है जो ना सिर्फ़ सोशल मीडिया पर सक्रीय हो बल्कि उसकी अच्छी ख़ासी डिजिटल फोल्लोविंग भी हो। 

नंदिनी ख़ुद भी इसका शिकार हुयी है, जहाँ उनसे भी ऑडिशन के दौरान इंस्टाग्राम प्रोफाइल मांगी गयी थी। अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि

“अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए उसमे मंझे हुए कलाकारों का होना बहुत ज़रूरी है। जो सोशल मीडिया पर पॉपुलर है, ज़रूरी नहीं कि वो एक अच्छा एक्टर भी हो या फ़िर जो एक उम्दा कलाकार हो, तो ज़रूरी नहीं कि वो सोशल मीडिया पर एक्टिव हो। इसलिए मेरा मानना है कि कास्टिंग के वक़्त सोशल मीडिया प्रोफाइल को ना देख करके, बल्कि टैलेंट और स्किल्स को मद्देनज़र कास्ट किया जाना चाहिए।” 

बॉलीवुड की बात करे तो नंदिनी रतना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah) और सुप्रिया पाठक (Supriya Pathak) के काम से बहुत प्रभावित है और उन्हीं की तरह वो अपने आप को भी एक वर्सटाइल एक्टर के रूप में स्थापित करना चाहती है। वो अलग-अलग तरह के रोल करना चाहती है ताकि अपने अभिनय के दम पर वो मनोरंजन जगत में अपनी एक अलग छाप छोड़ सके। शाहरुख़ खान (Shahrukh Khan), माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) और ऐश्वर्या राय (Aishwarya Rai) जैसे बॉलीवुड सितारों की ही तरह वो भी टैलेंट के दम पर एक ऊँचा मुक़ाम हांसिल करना चाहती है।

हिन्दी फ़िल्म जगत के दिग्गज़ निर्माता संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) की फ़िल्मो ने भी उन्हें काफ़ी प्रभावित किया है और देवदास (Devdas) उनकी पसंदिता फ़िल्मो में से एक है। भंसाली की फ़िल्मो में जिस तरह से म्यूजिक, कॉस्ट्यूम से ले कर सेट डिज़ाइन और सिनेमेटोग्राफी तक, हर पहलु पर बारीक़ी से ध्यान दिया जाता है और यही बात उनकी फ़िल्मो को भव्य और हट कर बनाता है। भंसाली के अलावा नंदिनी मैडॉक फ़िल्म्स (Maddock Films) के काम से भी बहुत प्रभावित है।

अपनी पहली ही फ़िल्म की कांन्स 2025 जैसे अंतराष्ट्रीय मंच पर प्रशंसा सुन कर उत्साहित और उत्सुक नंदिनी कहती है कि

“मैं एक बहुत ही महत्वकांक्षी इंसान हूँ और मौक़ा मिले तो संजय लीला भंसाली या फ़िर मैडॉक फ़िल्म्स जैसे प्रोडक्शन हाउसेस के साथ काम करना चाहूँगी। मैं धर्मा प्रोडक्शन की फ़िल्में देख कर बड़ी हुयी हूँ और चाहती हूँ कि मुझे भी बड़े परदे पर कभी शिफॉन की साडी पहन कर अपनी अदाएं दिखने का मौक़ा मिले। लेकिन मैं ख़ुद को फ़िल्मो तक ही सीमित नहीं रखना चाहती, मैं बहुत ही अच्छे और अलग-अलग तरीक़े के प्रोजेक्ट करना चाहती हूँ, फ़िर वो टीवी पर हो या चाहे ओटीटी पर ही क्यों ना हो। अपनी कला के जरिये लोगों के दिलो पर अमिट छाप छोड़ना चाहती हूँ।”

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